35 की उम्र के बाद शरीर में कई बदलाव आना स्वाभाविक माना जाता है। पहले की अपेक्षा एनर्जी कम महसूस होना, मेटाबॉलिज्म का धीमा पड़ना और वजन का धीरे-धीरे बढ़ना आम बात लग सकती है। ज्यादातर लोग इसे बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या हर बार बढ़ता वजन सिर्फ एजिंग की वजह से होता है? अगर आपका वजन बिना किसी बड़े बदलाव के अचानक बढ़ने लगे, जबकि खानपान और फिजिकल एक्टिविटी पहले जैसी ही हो, तो यह शरीर के अंदर किसी छिपी हुई समस्या का संकेत हो सकता है।
थायरॉइड क्या है और शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है?
थायरॉइड गर्दन के सामने मौजूद एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि होती है, लेकिन इसका काम शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह ग्रंथि मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है।जब थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, तो इस स्थिति को हाइपोथायरॉइडिज्म कहा जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने लगता है। इसका सीधा असर वजन बढ़ने, शरीर में सुस्ती और लगातार थकान के रूप में दिखाई देता है।
यही कारण है कि कई लोग बिना ज्यादा खाना खाए भी वजन बढ़ने की शिकायत करने लगते हैं। दरअसल, शरीर कैलोरी को पहले जितनी तेजी से बर्न नहीं कर पाता, जिससे अतिरिक्त वजन जमा होने लगता है।
35 की उम्र के बाद क्यों बढ़ जाता है थायरॉइड का खतरा?
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में हार्मोनल बदलाव तेज होने लगते हैं। खासकर महिलाओं में 35 साल के बाद हार्मोनल उतार-चढ़ाव, गर्भावस्था के बाद के बदलाव और ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण थायरॉइड की समस्या का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि, यह सोचना गलत होगा कि यह केवल महिलाओं की बीमारी है। पुरुष भी थायरॉइड डिसऑर्डर का शिकार हो सकते हैं। अगर बढ़ते वजन के साथ शरीर में कुछ और बदलाव भी महसूस हो रहे हों, तो इसे सामान्य मानकर टालना सही नहीं होगा।
थायरॉइड की समस्या होने पर शरीर कौन-कौन से संकेत देता है?
थायरॉइड की समस्या अक्सर धीरे-धीरे विकसित होती है, इसलिए इसके लक्षण तुरंत स्पष्ट नहीं होते। कई बार लोग महीनों तक इन संकेतों को समझ नहीं पाते।सबसे सामान्य संकेतों में लगातार थकान महसूस होना, बिना ज्यादा मेहनत के शरीर में कमजोरी रहना और हर समय सुस्ती महसूस होना शामिल है। इसके अलावा जरूरत से ज्यादा ठंड लगना, त्वचा का रूखा पड़ना और बालों का तेजी से झड़ना भी थायरॉइड के लक्षण हो सकते हैं।
समय पर जांच क्यों है जरूरी?
अच्छी बात यह है कि थायरॉइड की पहचान करना मुश्किल नहीं है। केवल एक साधारण ब्लड टेस्ट, जिसे थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TFT) कहा जाता है, से पता लगाया जा सकता है कि शरीर में थायरॉइड हार्मोन सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं।
अगर शुरुआती चरण में बीमारी पकड़ में आ जाए, तो इसका इलाज काफी आसान हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां, संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज और अच्छी नींद की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। कई मरीजों में इलाज के बाद ऊर्जा स्तर बेहतर होता है और वजन को नियंत्रित करना भी आसान हो जाता है।
हेल्दी लाइफस्टाइल क्यों है जरूरी?
थायरॉइड की समस्या होने पर केवल दवाइयों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। स्वस्थ जीवनशैली भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती है। रोजाना हल्की एक्सरसाइज, योग, पौष्टिक भोजन और तनाव को नियंत्रित करना मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
इसके अलावा पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है, क्योंकि खराब स्लीप साइकल हार्मोनल असंतुलन को और बढ़ा सकती है।