Chronic Illnesses In Senior Citizens in Hindi: जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की कार्यक्षमता कम होने लगती है। इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतों का असर दिखाई देने लगता है। इस कारण बुज़ुर्गों में कई तरह की क्रॉनिक यानी पुरानी बीमारियाँ आम हो जाती हैं, जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, आर्थराइटिस और हार्ट डिजीज। लेकिन अच्छी बात यह है कि समय रहते ध्यान दिया जाए तो इन बीमारियों को रोका या नियंत्रित किया जा सकता है। यहां हम कुछ सबसे आम पुरानी बीमारियाँ और उनसे बचाव के आसान और घरेलू उपायों के बारे में बता रहे हैं।
हाई ब्लड प्रेशर
इसे “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है क्योंकि अधिकतर लोगों को पता ही नहीं चलता और यह धीरे-धीरे दिल, किडनी या दिमाग पर असर डाल सकता है। इससे बचने के लिए नमक कम खाएं, रोज़ाना टहलें या योग करें, स्ट्रेस कम करने के लिए मेडिटेशन करें और नियमित ब्लड प्रेशर चेक करवाएं।
टाइप 2 डायबिटीज
उम्र के साथ शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाता है।
इससे बचने के लिए फाइबर वाला संतुलित आहार लें, मीठे से बचें, नियमित एक्सरसाइज करें और ब्लड शुगर चेक करवाते रहें।
ऑस्टियोआर्थराइटिस
घुटनों और जोड़ों में दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में दिक्कत इसका लक्षण है। इससे बचने के लिए हल्की एक्सरसाइज़ जैसे तैरना या ताई-ची करें, हल्दी और ओमेगा-3 जैसी एंटी-इंफ्लेमेटरी चीजें लें।
हार्ट डिजीज
दिल की बीमारियाँ जैसे हार्ट फेलियर और कोरोनरी आर्टरी डिजीज बुज़ुर्गों में जानलेवा साबित हो सकती हैं। यह बीमारी न हो इसके लिए फलों, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स से भरपूर भोजन लें, धूम्रपान और शराब से बचें और नियमित ईसीजी करवाएँ।
किडनी का रोग
लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज रहने से किडनी धीरे-धीरे खराब हो सकती है।
इसलिए पानी खूब पिएं, प्रोसेस्ड और नमकीन चीजों से दूर रहें, शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखें।
सांस की समस्याएं
उम्र के साथ फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और प्रदूषण या धूम्रपान इसका खतरा बढ़ाते हैं।
इससे बचने के लिए धूल और धुएं से बचें, नियमित प्राणायाम करें और फ्लू तथा निमोनिया की वैक्सीन लगवाएँ।
ऑस्टियोपोरोसिस
उम्र बढ़ने पर हड्डियाँ कमजोर होकर टूटने का खतरा पैदा करती हैं। बुजुर्गों में यह समस्या सबसे ज्यादा होती है। इसलिए कैल्शियम और विटामिन D लें, वॉकिंग या सीढ़ी चढ़ना जैसी वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज़ करें।
अल्जाइमर और डिमेंशिया
बुढ़ापे में याददाश्त कमजोर होना और सोचने की क्षमता घटना एक आम समस्या है। इस उम्र में अपनी खूब देखभाल करें। इस समस्या से बचने के लिए किताबें पढ़ें, पजल्स हल करें, सामाजिक रूप से जुड़े रहें और एंटीऑक्सीडेंट वाला खाना खाएं।
डिप्रेशन और एंग्जायटी
बुज़ुर्गों में अकेलापन, दुख या लगातार दर्द मानसिक समस्याएँ बढ़ा सकते हैं। यह अधिकतर बुजुर्गों में देखने को मिलता है। इससे बचने के लिए परिवार और दोस्तों से मिलते रहें, ध्यान और योग करें और ज़रूरत हो तो डॉक्टर से मिलें।
आंखों और कानों की समस्याएँ
बुढ़ापे में सीनियर सिटिजन को मोतियाबिंद, ग्लूकोमा या उम्र से जुड़ी सुनने की समस्याएँ आम हैं। इससे बचाव के लिए धूप से आंखों को बचाएँ, साल में एक बार आंख और कान की जांच कराएँ और जरूरत हो तो चश्मा या सुनने की मशीन का प्रयोग करें।