पिछले कुछ वर्षों में भारत में 20 से 35 वर्ष की उम्र की महिलाओं में गर्भाशय में फाइब्रॉइड (Fibroids) या रसौलियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। फाइब्रॉइड एक प्रकार की नॉन – कैंसरस गांठ होती है, जो आमतौर पर गर्भाशय की मांसपेशियों में विकसित होती है। पहले यह समस्या 40 की उम्र के बाद पाई जाती थी, लेकिन अब युवतियों और कम उम्र की महिलाओं में भी इसके लक्षण दिखाई देने लगे हैं।
यह आमतौर पर गलत खानपान, तनाव, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और हार्मोनल असंतुलन, के कारण विकसित होता है।हालांकि इसका निदान समय पर किया जाए तो इसे ठीक किया जा सकता है।
महिलाओं में फाइब्रॉइड(Fibroid) होने के कारण
- एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ना
- मोटापा और अधिक वसा
- जल्दी मासिक धर्म शुरू होना
- परिवार में पहले से फाइब्रॉइड का इतिहास
- प्रोसेस्ड फूड और रिफाइंड कार्ब्स का अधिक सेवन
- तनाव और नींद की कमी
- हार्मोनल दवाओं का अनियंत्रित उपयोग
फाइब्रॉइड के लक्षण क्या हैं?
- अनियमित या अधिक मासिक रक्तस्राव
- पेट के निचले हिस्से में भारीपन या दर्द
- बार-बार पेशाब आना
- सेक्स के दौरान दर्द
- बांझपन या गर्भधारण में कठिनाई
इन लक्षणों को अक्सर महिलाएं सामान्य समझकर अनदेखा कर देती हैं, जिससे समस्या गंभीर हो सकती है।
फाइब्रॉइड से बचने के उपाय
वजन कंट्रोल रखें
मोटापा शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को बढ़ाता है, जिससे फाइब्रॉइड की संभावना बढ़ती है। महिलाओं को नियमित एक्सरसाइज और कम कैलोरी वाले पोषक आहार का सेवन कर वजन को नियंत्रित रखना चाहिए।
रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं
फास्ट फूड, प्रोसेस्ड मीट और अत्यधिक रेड मीट का सेवन हार्मोन असंतुलन बढ़ाता है। इसके स्थान पर पनीर, दालें, मछली और फलियां का सेवन करें।
हरी सब्ज़ियां और फल ज़्यादा खाएं
पालक, चौलाई, मेथी जैसे भारतीय साग और मौसमी फल एंटीऑक्सिडेंट और फ्लावोनॉइड्स से भरपूर होते हैं, जो सूजन और हार्मोनल असंतुलन को कम करते हैं।
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की जगह साबुत अनाज लें
मैदा और सफेद चावल की जगह जौ, बाजरा, ब्राउन राइस और गेहूं जैसे अनाज लें, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखते हैं और हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं।
प्लास्टिक और हानिकारक कॉस्मेटिक्स से बचें
प्लास्टिक बोतलों, खाने के डिब्बों और कैमिकल युक्त सौंदर्य उत्पादों में ऐसे रसायन होते हैं जो सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। इसलिए ग्लास या स्टील के बर्तन और प्राकृतिक स्किनकेयर उत्पाद इस्तेमाल करें।
तनाव न लें
लगातार तनाव कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाता है, जिससे प्रजनन हार्मोन असंतुलित हो सकते हैं। योग, ध्यान, प्राणायाम, और प्रकृति में समय बिताना जैसे उपाय प्रभावी हो सकते हैं।
मासिक धर्म के लक्षणों पर ध्यान दें
अगर मासिक धर्म बहुत भारी हो, दर्द हो या समय पर न आए, तो डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच से फाइब्रॉइड की पहचान और इलाज संभव है।
हार्मोनल गोलियां न लें
गर्भनिरोधक गोलियों का अधिक या अनियमित उपयोग हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना इन्हें न लें।
नियमित एक्सरसाइज करें
30 मिनट की तेज चलना, योग, डांस या एरोबिक्स जैसी गतिविधियाँ शरीर में सूजन को घटाकर हार्मोनल संतुलन बनाती हैं।
परिवार में फाइब्रॉइड का इतिहास जानें
अगर मां, बहन या दादी को फाइब्रॉइड रहा है, तो खुद को प्रभावित मानकर समय पर स्क्रीनिंग और जीवनशैली में बदलाव करें।
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