पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) आज की महिलाओं में तेजी से बढ़ता एक हार्मोनल विकार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह प्रजनन आयु की 6-13% महिलाओं को प्रभावित करता है, और उनमें से लगभग 70% मामलों में इसका निदान नहीं हो पाता। यह न सिर्फ मासिक धर्म की अनियमितता और बांझपन का कारण बनता है, बल्कि लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डालता है।
PCOS और मस्तिष्क की कार्यक्षमता:
हाल ही में आईआईटी बॉम्बे की एक शोध में खुलासा हुआ है कि PCOS न केवल मानसिक स्वास्थ्य जैसे तनाव और डिप्रेशन को प्रभावित करता है, बल्कि यह ध्यान केंद्रित करने और सोचने की क्षमताको भी नुकसान पहुंचाता है।
क्या पाया गया इस अध्ययन में?
- पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं ने ध्यान केंद्रित करने वाले परीक्षण में 50% अधिक समय लिया और लगभग 10% अधिक गलतियाँ कीं।
- “डिवाइडेड अटेंशन टेस्ट” (एक साथ कई कार्यों पर ध्यान देने वाला परीक्षण) में भी वे 20% धीमी रहीं और 3% अधिक गलतियाँ हुईं।
- इसका मुख्य कारण हार्मोनल असंतुलन, इंसुलिन रेजिस्टेंस, और मानसिक तनाव जैसे चिंता और निराशा माने गए।
PCOS के अन्य प्रमुख लक्षण:
- अनियमित पीरियड्स
- चेहरे पर अधिक बाल
- बालों का झड़ना या पतले होना
- मुँहासे
- वजन बढ़ना
- प्रेगनेंसी में कठिनाई
- अंडाशयों में सिस्ट बनना
PCOS के गंभीर दुष्परिणाम:
1. बांझपन
PCOS के कारण अंडोत्सर्ग बाधित होता है, जिससे गर्भधारण में समस्या आती है। यह महिलाओं में बांझपन का एक प्रमुख कारण है।
2. मेटाबोलिक संबंधी समस्याएं:
PCOS से पीड़ित महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस अधिक होती है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज और मेटाबोलिक सिंड्रोम होने का खतरा बढ़ जाता है।
3. हृदय रोग:
हार्मोनल असंतुलन और वजन बढ़ने से हृदय से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है।
4. मानसिक स्वास्थ्य पर असर :
शारीरिक लक्षणों जैसे वजन बढ़ना, चेहरे पर बाल आना, और गर्भधारण में समस्या के कारण महिलाओं में आत्म-सम्मान की कमी, तनाव और अवसाद उत्पन्न हो सकता है।
5. वजन से जुड़ी समस्याएं:
PCOS वजन बढ़ाने का कारण तो बनता ही है, लेकिन इससे वजन कम करना भी बेहद मुश्किल हो जाता है।
क्या PCOS का इलाज संभव है?
PCOS एक पुरानी और असाध्य समस्या है, यानी इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। लेकिन अच्छी खबर यह है कि इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है:
- संतुलित आहार: फाइबर युक्त, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों का सेवन फायदेमंद होता है।
- नियमित एक्सरसाइज: रोज़ाना 30 मिनट की शारीरिक सक्रियता हार्मोन संतुलन में मदद करती है।
- दवाएं: मासिक धर्म को नियमित करने और इंसुलिन रेजिस्टेंस को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की सलाह से दवाओं का सेवन करें।
- मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान: योग, ध्यान और काउंसलिंग से तनाव और अवसाद में राहत मिल सकती है।
PCOS केवल एक हार्मोनल समस्या नहीं है, यह महिलाओं के शारीरिक और मानसिक कौशल को भी प्रभावित करता है। समय रहते इसका निदान और इलाज बेहद ज़रूरी है। सही जानकारी, स्वस्थ जीवनशैली, और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देकर इसके प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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