आजकल हेल्थ और फिटनेस के नाम पर विटामिन, मिनरल्स और हर्बल सप्लीमेंट्स का चलन तेजी से बढ़ गया है। लोग मानते हैं कि ज्यादा सप्लीमेंट लेने से जल्दी फायदा होगा, लेकिन यह सच नहीं है। “ज्यादा” का मतलब हमेशा “बेहतर” नहीं होता। सप्लीमेंट्स तब फायदेमंद होते हैं जब इन्हें डॉक्टर की सलाह से जरूरत के हिसाब से लिया जाए, लेकिन अधिक मात्रा में लेने पर ये शरीर में नुकसान भी कर सकते हैं।
कई लोग अनजाने में अलग-अलग सप्लीमेंट्स एक साथ लेने लगते हैं जिनमें एक जैसे तत्व होते हैं, या ज्यादा डोज लेने लगते हैं, जिससे शरीर पर गलत असर पड़ता है। इससे लीवर, किडनी पर दबाव पड़ सकता है और दवाओं के साथ घातक रिएक्शन भी हो सकता है।
पेट खराब होना
बहुत ज्यादा विटामिन C या मैग्नीशियम लेने से दस्त, पेट में मरोड़, उल्टी या कब्ज हो सकती है। यह सबसे पहले दिखने वाला संकेत है कि सप्लीमेंट ज्यादा हो रहे हैं।
कमजोरी या थकान
ज्यादा आयरन या विटामिन A लेने से उल्टा शरीर में कमजोरी, थकान और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि शरीर में विषाक्तता और असंतुलन बनने लगता है।
सिरदर्द और माइग्रेन
अधिक मात्रा में विटामिन B6, नियासिन या हाई डोज प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स लेने से लगातार सिरदर्द या माइग्रेन हो सकते हैं।
मुंह में धातु जैसा स्वाद
जिंक या विटामिन D ज्यादा लेने पर मुंह में धातु जैसा स्वाद या सांस से अजीब गंध आ सकती है, जो शरीर में इनके जमाव का संकेत है।
लीवर और किडनी पर दबाव
फैट-सॉल्युबल विटामिन (A, D, E, K), ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट या हाई प्रोटीन सप्लीमेंट्स का लंबे समय तक ज्यादा उपयोग लीवर और किडनी पर बुरा असर डाल सकता है। इसके लक्षण तुरंत नहीं दिखते, पर नुकसान गंभीर हो सकता है।
या ब्लड प्रेशर बढ़ना
अत्यधिक कैफीन, प्री-वर्कआउट या वजन घटाने वाले सप्लीमेंट्स लेने से नसों में उत्तेजना बढ़कर दिल की धड़कन तेज हो सकती है या ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
हड्डियों में दर्द या कमजोरी
बहुत ज्यादा विटामिन D लेने से खून में कैल्शियम बढ़ सकता है, जिससे हड्डियों में दर्द, उलझन और दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है।
न्यूट्रिएंट असंतुलन
कुछ सप्लीमेंट्स दूसरे न्यूट्रिएंट्स के अवशोषण में बाधा डालते हैं। जैसे कि ज्यादा जिंक लेने से कॉपर कम हो सकता है या ज्यादा कैल्शियम लेने से मैग्नीशियम की कमी हो सकती है।
मूड स्विंग्स और नींद में बाधा
अधिक मात्रा में B विटामिन्स, मेलाटोनिन या स्टिमुलेंट वाले सप्लीमेंट्स लेने से चिड़चिड़ापन, बेचैनी या नींद की समस्या हो सकती है।
ओवरकंजम्पशन से कैसे बचें?
डॉक्टर से सलाह लें – कोई भी नया सप्लीमेंट शुरू करने से पहले, खासकर अगर आप दवाएं ले रहे हैं या किसी बीमारी से जूझ रहे हैं।
लेबल ध्यान से पढ़ें – खासकर डेली वैल्यू प्रतिशत और अन्य सामग्री।
मेगाडोज से बचें – जब तक डॉक्टर ना कहें, ज्यादा डोज न लें। संतुलित भोजन से अधिकतर जरूरतें पूरी होती हैं।
मल्टीपल प्रोडक्ट्स से बचें – एक ही तत्व के अलग-अलग प्रोडक्ट्स लेने से डोज बढ़ सकती है।
सप्लीमेंट डायरी रखें – कब, कितना और क्या ले रहे हैं, इसका रिकॉर्ड रखें।
ब्लड टेस्ट कराएं – लंबे समय तक सप्लीमेंट लेने पर पोषक तत्वों के स्तर की जांच करवाएं।
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1 comment
Nice blog